नहीं देखि बंसी तोरी कन्हिया
00:00
00:00
Embed Code (recommended way)
Embed Code (Iframe alternative)
Please login or signup to use this feature.

नहीं देखी बँसी तोरी कन्हैया, क्यों जबरन चोरी लगायें रे
चार सखि मिल पाणी गई थीं,जमुना घाट पर भीड़ भारी
ग्वाल बाल तेरे संग अनेकों = खेल म बँसी गवाई हों
सोलह सिंगार सजी सब सखियाँ,सिरपर मटकी जल भरी
वाट में तु क्यों रोके हों छलिया = गीर गई बँसी तुम्हारी
तेरे सरीके हम नहीं मोहन, माखन चोरी न खायमे
कहा लग तुमको कहें समझाई = तुझको लाज नहीं आवे
गले मुतियन की माला हो चमके, कानों में कुंडल झलके
नरस्यानु स्वामी न अंतरयामी = रूडा रास रमाई रे

Licence : All Rights Reserved


X