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  • Madhur Sur Na-Muskan By Muskan Soni मधुर सुर न सुनाई दें जिस घर से वो घर कैसा न मांडी जाए रंगोली जिस दर पे वो दर कैसा ? मधुर सुर न सुनाई दें जिस घर से वो घर कैसा न मांडी जाए रंगोली जिस दर पे वो दर कैसा ? ******************** बिना बेटी के घर लगते अमावस की घुप रातें न रुन झुन पायलें बजतीं न होती हैं मृदुल बातें न दीवारों पे रौनक और देहरी से चमक गायब- देखता जो भी सोचे ये घर तो है मगर कैसा ..? मधुर सुर न सुनाई दें जिस घर से वो घर कैसा ******************** वो बेटी ही तो होती है कुलों को जोड़ लेती है अगर अवसर मिले तो वो मुहाने मोड़ देती है युगों से बेटियों को तुम परखते हो न जाने क्यूं..? जनम लेने तो दो उसको जनम-लेने से डर कैसा..? मधुर सुर न सुनाई दें जिस घर से वो घर कैसा ******************** पालने से पालकी तक की चिंता छोड़ के आना वो बेटों से भी बेहतर है ये चिंतन जोड़ ते लाना उसे तुमने जो अब मारा धरा दरकेगी ये तय है- उसे ताक़त बनाओगे जमाने से डर कैसा ? मधुर सुर न सुनाई दें जिस घर से वो घर कैसा Lyrics Girish Billore, Singer- Muskan Soni
    Bal.Bhavan... 00:05:03 15 0 Downloads 0 Comments
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