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नहीं देखि बंसी …ोरी कन्हिया

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नहीं देखी बँसी तोरी कन्हैया, क्यों जबरन चोरी लगायें रे
चार सखि मिल पाणी गई थीं,जमुना घाट पर भीड़ भारी
ग्वाल बाल तेरे संग अनेकों = खेल म बँसी गवाई हों
सोलह सिंगार सजी सब सखियाँ,सिरपर मटकी जल भरी
वाट में तु क्यों रोके हों छलिया = गीर गई बँसी तुम्हारी
तेरे सरीके हम नहीं मोहन, माखन चोरी न खायमे
कहा लग तुमको कहें समझाई = तुझको लाज नहीं आवे
गले मुतियन की माला हो चमके, कानों में कुंडल झलके
नरस्यानु स्वामी न अंतरयामी = रूडा रास रमाई रे

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